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Karen Koi Bhare Koi: शरारती आर्यन और सीसीटीवी का सच :- दोस्तों, क्या स्कूल में कभी ऐसा हुआ है कि शैतानी 'बैकबेंचर्स' ने की हो और डांट पूरी क्लास को पड़ गई हो? इसे ही कहते हैं—Karen Koi Bhare Koi। शहर की ऊंची इमारतों और स्मार्ट लाइफस्टाइल के बीच भी यह कहावत सच साबित होती है। यह कहानी 'मेट्रो सिटी' के एक हाई-टेक अपार्टमेंट की है। जहाँ आर्यन की एक छोटी सी लापरवाही ने उसके सीधे-सादे दोस्त ध्रुव को मुसीबत में डाल दिया। लेकिन याद रखना, आज के दौर में 'तीसरी आँख' (CCTV) सब देख रही है। तो चलिए देखते हैं, इस मॉडर्न कहानी में न्याय कैसे हुआ।
कहानी: ड्रोन, धमाका और गलतफहमी
मेट्रो हाइट्स के दो अलग दोस्त
मुंबई जैसे भागते हुए शहर में, 'मेट्रो हाइट्स' नाम की एक पॉश सोसाइटी थी। वहां दो गहरे दोस्त रहते थे—आर्यन और ध्रुव।
आर्यन थोड़ा 'कूल डूड' टाइप का था। बिखरे बाल, महंगी टी-शर्ट और गैजेट्स का शौकीन। उसे लगता था कि नियम तोड़ने में ही असली मज़ा है। दूसरी तरफ ध्रुव था—चश्मा लगाने वाला, शर्ट के बटन बंद रखने वाला और नियमों का पक्का। वह हमेशा आर्यन को कहता, "भाई, पंगा मत ले, भारी पड़ेगा।" लेकिन आर्यन हँसकर टाल देता।
सोसाइटी का सबसे सख्त नियम था—"पार्किंग एरिया में खेलना मना है।" वजह साफ़ थी, वहां लोगों की लाखों की गाड़ियां खड़ी रहती थीं। और सबसे महंगी गाड़ी थी सोसाइटी के सेक्रेटरी, मिस्टर खन्ना की चमचमाती काली सेडान। खन्ना जी अपनी गाड़ी को बेटे से ज्यादा प्यार करते थे। अगर उस पर एक खरोंच भी आ जाए, तो पूरी बिल्डिंग सिर पर उठा लेते थे।
आर्यन का नया खिलौना और रिस्क
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एक रविवार की शाम, आर्यन को उसके पापा ने एक नया 'हाई-स्पीड ड्रोन' गिफ्ट किया। आर्यन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। वह दौड़कर ध्रुव के पास गया। "देख ध्रुव! क्या चीज़ है। आज इसे पार्किंग में उड़ाएंगे, वहां खुली जगह है।"
ध्रुव ने मना किया, "पागल है क्या? खन्ना अंकल देख लेंगे तो वाट लगा देंगे। टेरेस पर चलते हैं।" आर्यन ने ज़िद की, "अरे डरपोक! टेरेस पर हवा तेज़ है। पार्किंग में कोई नहीं है अभी। बस 5 मिनट उड़ाएंगे और वापस आ जाएंगे।"
न चाहते हुए भी ध्रुव, आर्यन के साथ बेसमेंट पार्किंग में चला गया। आर्यन ने रिमोट हाथ में लिया और ड्रोन को हवा में उड़ाया। ज़ूम-ज़ूम! नीली लाइट वाला ड्रोन हवा में बातें करने लगा। आर्यन स्टंट दिखा रहा था और ध्रुव बस दुआ कर रहा था कि कोई आ न जाए।
धड़ाम! और गायब आर्यन
आर्यन का जोश बढ़ता गया। "ध्रुव, अब देख! '360 डिग्री फ्लिप'!" आर्यन ने जॉयस्टिक घुमाया। ड्रोन तेज़ी से पलटा, लेकिन आर्यन का कंट्रोल छूट गया। ड्रोन हवा में लहराया और सीधा एक खंभे से टकराकर—धड़ाम!—मिस्टर खन्ना की काली सेडान के साइड मिरर (Side Mirror) पर जा गिरा।
चटाक! कांच टूटने की तेज़ आवाज़ गूंजी। मिरर टूटकर ज़मीन पर बिखर गया और ड्रोन भी वहीं गिर पड़ा।
आर्यन के तो होश उड़ गए। "गई भैंस पानी में!" वह चिल्लाया। तभी लिफ्ट का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। कोई आ रहा था। आर्यन घबरा गया। उसने न ड्रोन उठाया, न दोस्त को देखा। वह सीधा सीढ़ियों की तरफ भागा और वहां पड़े पुराने बक्सों के पीछे छुप गया।
ध्रुव हैरान खड़ा था। उसे समझ नहीं आया कि भागना है या रुकना है। वह टूटे हुए कांच और गिरे हुए ड्रोन को देखने लगा। तभी खन्ना जी लिफ्ट से बाहर आए।
गलतफहमी का शिकार (करें कोई भरे कोई)
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मिस्टर खन्ना ने अपनी प्यारी गाड़ी का हाल देखा। फिर उन्होंने देखा कि पास में ध्रुव खड़ा है और उसके पैरों के पास टूटा हुआ ड्रोन पड़ा है। "ध्रुव!" खन्ना जी की आवाज़ पार्किंग में गूंजी।
ध्रुव कांपने लगा। "अंकल... वो... मैं..." "चुप रहो!" खन्ना जी ने डांटा। "तुमने मेरी गाड़ी तोड़ी? तुम्हें पता है यह मिरर कितने का आता है? और यहाँ खेलना मना है, यह बोर्ड पढ़ना नहीं आता तुम्हें?"
ध्रुव ने सफाई देने की कोशिश की, "अंकल, मैंने नहीं किया। यह ड्रोन मेरा नहीं है।" "अकेले तुम खड़े हो यहाँ। तो क्या भूत ने किया है? झूठ मत बोलो। अभी तुम्हारे पापा को फोन करता हूँ," खन्ना जी ने फ़ोन निकाल लिया।
छिपा हुआ आर्यन सब देख रहा था। उसका दिल धक-धक कर रहा था। उसे पता था कि गलती उसकी है। लेकिन डर के मारे उसके पैर जम गए थे। इसे ही कहते हैं 'करें कोई भरे कोई'। आर्यन की मस्ती की सजा अब शरीफ ध्रुव को मिल रही थी। ध्रुव की आँखों में आंसू आ गए थे, लेकिन वह अपने दोस्त का नाम नहीं ले रहा था (शायद दोस्ती निभा रहा था)।
तीसरी आँख का सच (Logic & Twist)
तभी वहां सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड, रामू काका, दौड़ते हुए आए। "क्या हुआ साहब?" खन्ना जी ने चिल्लाकर कहा, "देखो इस लड़के को! इसने मेरी गाड़ी तोड़ दी।"
रामू काका ने ध्रुव को देखा, फिर टूटे हुए ड्रोन को। उन्होंने सिर खुजाया। "साहब, माफ़ करना, लेकिन ध्रुव बाबा तो ऐसा नहीं करते। और यह ड्रोन... यह तो मैंने आर्यन बाबा के हाथ में देखा था जब वो लिफ्ट से नीचे आ रहे थे।"
खन्ना जी रुके। "क्या?" रामू काका ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला। "साहब, आप भूल गए? पिछले हफ्ते ही तो आपने यहाँ नया CCTV कैमरा लगवाया है। मेरे फ़ोन में उसका लाइव फीड आता है। अभी चेक कर लेते हैं।"
बक्सों के पीछे छिपे आर्यन का पसीना छूट गया। रामू काका ने वीडियो प्ले किया। वीडियो में साफ़ दिखा—आर्यन रिमोट चला रहा है, ड्रोन टकराता है, और आर्यन भागकर छुप जाता है जबकि ध्रुव बस खड़ा रह जाता है।
क्लाइमेक्स: दोस्ती की परीक्षा
खन्ना जी ने वीडियो देखा और बक्सों की तरफ घूमे। "आर्यन! बाहर निकलो!" आर्यन धीरे-धीरे बाहर आया, सिर झुकाए हुए।
खन्ना जी ने ध्रुव के कंधे पर हाथ रखा। "सॉरी बेटा, मैंने तुम्हें बिना सबूत के डांटा।" फिर वे आर्यन की तरफ मुड़े। "और तुम! गलती करना बचपना है, लेकिन गलती करके दोस्त को फंसाना कायरता है। तुम्हारे पापा को तो मैं बताऊंगा ही, और इस ड्रोन को मैं ज़ब्त कर रहा हूँ जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती।"
आर्यन ने रोते हुए ध्रुव से माफ़ी मांगी। "सॉरी यार ध्रुव। मैं डर गया था।" ध्रुव ने चश्मा ठीक करते हुए कहा, "दोस्त, डरना ठीक है, पर भागना नहीं। आज अगर कैमरा नहीं होता, तो तेरी मस्ती का बिल मेरे पापा भरते।"
निष्कर्ष: सच छुपता नहीं
उस दिन आर्यन ने एक बड़ा सबक सीखा। उसने अपनी पॉकेट मनी जोड़कर खन्ना जी की गाड़ी का नुकसान भरा। सोसाइटी के बच्चों ने भी समझ लिया कि शहर में दीवारें चाहे कितनी भी ऊँची हों, सच छुप नहीं सकता। गलती जिसकी हो, भरपाई भी उसी को करनी चाहिए।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह मॉडर्न सीख मिलती है:
ज़िम्मेदारी लें (Take Responsibility): अपनी गलती मान लेने से आप छोटे नहीं होते, बल्कि साहसी कहलाते हैं। भागने से समस्या और बड़ी हो जाती है।
सच की जीत: आप चाहे कितनी भी चालाकी कर लें, सच (या CCTV) सामने आ ही जाता है। निर्दोष को फंसाना सबसे बुरा काम है।
Wikipedia Link
अधिक जानकारी के लिए देखें: कर्म - विकिपीडिया
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